इस्लाम में कितना नमाज है

 




इस्लाम में नमाज़ों को उनकी अहमियत और वक्त के हिसाब से अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है। यहाँ सभी प्रमुख नमाज़ों की पूरी जानकारी दी गई है:

1. फ़र्ज़ नमाज़ें (जो हर मुसलमान पर अनिवार्य हैं)

दिन भर में पाँच वक्त की नमाज़ें पढ़ना हर बालिग मुसलमान पर फ़र्ज़ है:

 * फज्र (Fajr): सुबह सादिक (सूरज निकलने से पहले) की नमाज़। इसमें 2 रकात सुन्नत और 2 रकात फ़र्ज़ होते हैं।

 * ज़ुहर (Dhuhr): दोपहर के वक्त की नमाज़। इसमें 4 रकात सुन्नत, 4 रकात फ़र्ज़, 2 रकात सुन्नत और 2 रकात नफ़्ल होते हैं।

 * असर (Asr): तीसरे पहर (शाम से पहले) की नमाज़। इसमें 4 रकात सुन्नत (गैर-मुअक्कदा) और 4 रकात फ़र्ज़ होते हैं।

 * मग़रिब (Maghrib): सूरज डूबने के तुरंत बाद की नमाज़। इसमें 3 रकात फ़र्ज़, 2 रकात सुन्नत और 2 रकात नफ़्ल होते हैं।

 * इशा (Isha): रात की नमाज़। इसमें 4 रकात सुन्नत, 4 रकात फ़र्ज़, 2 रकात सुन्नत, 2 रकात नफ़्ल, 3 रकात वित्र और 2 रकात नफ़्ल होते हैं।

2. वाजिब नमाज़ें

ये नमाज़ें फ़र्ज़ के बाद सबसे अहम होती हैं और इन्हें छोड़ना नहीं चाहिए:

 * वित्र (Witr): यह इशा की नमाज़ के साथ पढ़ी जाती है (3 रकात)।

 * ईद की नमाज़: ईद-उल-फ़ित्र और ईद-उल-अज़हा के दिन पढ़ी जाने वाली 2 रकात नमाज़।

3. सुन्नत और नफ़्ल नमाज़ें (खास मौकों के लिए)

ये नमाज़ें सवाब हासिल करने और अल्लाह की नजदीकी के लिए पढ़ी जाती हैं:

 * तहज्जुद (Tahajjud): रात के आखिरी हिस्से में पढ़ी जाने वाली बहुत अफ़ज़ल नमाज़।

 * इशराक़ (Ishraq): सूरज निकलने के थोड़ी देर बाद (लगभग 15-20 मिनट बाद) की नमाज़।

 * चाश्त (Chasht/Duha): सूरज चढ़ने के बाद (दोपहर से पहले) की नमाज़।

 * अव्वाबीन (Awwabin): मग़रिब और इशा के बीच पढ़ी जाने वाली नमाज़।

 * सलातुल तस्बीह (Salat-ul-Tasbih): गुनाहों की माफ़ी के लिए एक खास तरीके से पढ़ी जाने वाली नमाज़।

 * तहियतुल वज़ू: वज़ू करने के फ़ौरन बाद पढ़ी जाने वाली 2 रकात।

 * तहियतुल मस्जिद: मस्जिद में दाखिल होने पर पढ़ी जाने वाली 2 रकात।

4. खास हालात की नमाज़ें

 * जुमा (Jummah): हर शुक्रवार को ज़ुहर के वक्त जमात के साथ पढ़ी जाने वाली नमाज़।

 * तरावीह (Tarawih): रमज़ान के महीने में इशा के बाद पढ़ी जाने वाली नमाज़।

 * जनाज़ा (Janaza): किसी मुसलमान के इंतकाल के बाद उसके लिए पढ़ी जाने वाली दुआ (नमाज़)।

 * सलातुल इस्तिख़ारा: जब किसी काम में अल्लाह की मदद या फैसला चाहिए हो।

 * सलातुल हाजत: जब कोई खास ज़रूरत या परेशानी हो।

 * नमाज़-ए-कसूफ/खसूफ: सूरज ग्रहण या चंद्र ग्रहण के वक्त की नमाज़।

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